शनिवार, 19 मार्च 2016

व्योमेश चित्रवंश की डायरी 18.03.2016

18मार्च 2016, शुक्रवार
 कल दसियो दिन बाद ग्राउंड गया, तो रात मे जल्दी ही सो गया, सुबह उठने परताजगी के साथ मौसम व अखबार का जायजा लिया. थोड़ी देर धूप मे किताबे पढ़ने का सुख फिर कचहरी, उम्मीद के अनुरूप हड़ताल व शोक प्रस्ताव पर मिला जुला असर दिखा, एक लंबे अरसे के बाद गुरू जी के यहॉ जाना हुआ. ढेर सारी बाते व आत्मसंतोष का अपना एकअलग सुख है
.न्यास व सोसाइटी के लोग अपने अपने स्तर से अपने प्रयासो मे लगे हुये है. दो पुस्तको को पढ़ने की बड़ी बलवती ईच्छा है कुर्तलुन एन हैदर की आग का दरिया व भगवान सिंह का अपने अपने राम. नेट पर सर्च कर के दोनो पुस्तको को अपने आनलाईन परचेजिंग कार्ट मे सहेज लिया है पर अभी पहले की बिनपढ़ी पुस्तके ही शेष है, नेट के वजह से वो बिलंबित कार्यसूची मे शामिल हो गई है, इसे रोकना है.
कल से किताबे पढ़ने की सूची को प्राथमिकता देना होगा.

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