अवढरदानी महादेव शंकर की राजधानी काशी मे पला बढ़ा और जीवन यापन कर रहा हूँ. कबीर का फक्कडपन और बनारस की मस्ती जीवन का हिस्सा है, पता नही उसके बिना मैं हूँ भी या नही. राजर्षि उदय प्रताप के बगीचे यू पी कालेज से निकल कर महामना के कर्मस्थली काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मे खेलते कूदते कुछ डिग्रीयॉ पा गये, नौकरी के लिये रियाज किया पर नौकरी नही मयस्सर थी. बनारस छोड़ नही सकते थे तो अपनी मर्जी के मालिक वकील बन बैठे.
शुक्रवार, 30 मई 2025
व्योमवार्ता/ मेरे शहर में नवतपा.......
बुधवार, 28 मई 2025
बनारस इस पार और उस पार......(बनारस पर कविता -1)
तरना रेलवे ओवर बृज के
नीचे उतरने वाले फ्लाईओवर से
बदलते बनारस को
मेट्रो सिटी के लुक में
फिल्मों के रीलों में चलती जैसे
ओवरबृज के पार
दिखती बहुमंजिली इमारतें
उन पर चमकतें ग्लोसाईन बोर्ड
नहीं पता चलता
हम इमारत की तरफ है
या उसके दूसरी ओर
पुल के ऊपर आ कर
संशय दूर होता है
कि हम इमारत के ओर हैं
यानि इसी पार
पर पीछे देखने पर
हम फिर उस पार हो जाते है
एक भ्रम और संशय को जीते
बनारस के मर्म और अध्यात्म के जैसे
जीवन के इस पार
भौतिकता, सांसारिकता, स्वार्थ और अहम
और उस पार
आत्मा के चरम पर, शरीर से परे
सिर्फ आत्मा अघोर शून्य और शिव
वह ऊँचा ओवरबृज
दूर कर देता है मन व जीवन के संशय को
बनारस को महसूस करने जैसे
वैसे भी इस शहर को समझने के लिये
बनना पड़ता है कबीर
चढ़ना होता है मन की ऊंचाइयों पर
तब हम देख पाते है
बनारस को मन की आखों से
जान पाते है बनारस को
जीवन के इस पार
और उस पार के सच को
जो बनारस दिखाता है
रेलवे ओवरबृज की ऊंचाइयों जैसे
इस पार और उस पार का बनारस
प्रकृति और पुरुष के मध्य का बनारस...
- व्योमेश चित्रवंश
28मई2025 बुधवार
Banaras: This Side and the Other...
I watch
From the flyover descending
Beneath the Tarna railway overbridge,
The changing face of Banaras
In its new "metro city" look—
Moving like frames in a film reel.
Beyond the overbridge,
Multi-storied buildings appear,
Their glowing signboards shimmering.
It is hard to tell
If we are toward the buildings
Or on the opposite side.
Reaching the top of the bridge,
The doubt clears:
We are on the side of the structures—
On this side.
But looking back,
We find ourselves on the other side once more.
Living within a haze of illusion and doubt,
Much like the essence and spirituality of Banaras.
On this side of life:
Materialism, worldliness, selfishness, and ego.
And on the other side:
The peak of the soul, beyond the body—
Only the soul, the Aghor (fearless/limitless) void, and Shiva.
That high overbridge
Dissolves the doubts of mind and life,
Much like the feeling of truly sensing Banaras.
Anyway, to understand this city,
One must become a Kabir—
One must climb the heights of the mind.
Only then can we see
Banaras through the eyes of the soul.
Only then can we know Banaras—
The truth of this side of life,
And the truth of the other,
Which Banaras reveals
From the heights of a railway overbridge.
Banaras: of this side and the other...
Banaras: existing between Nature (Prakriti) and the Cosmic Soul (Purusha).
— Vyomesh Chitravansh
Wednesday, May 28, 2025
रविवार, 25 मई 2025
व्योमवार्ता/ मित्रता (कविता)
मात्र एक शब्द नही,
एक अहसास है,
जिसे बस महसूस किया जा सकता है,
ठीक वैसे हो जैसे सांसों में गर्मी को,
बर्फ में पानी को,
गुड़ में मिठास को,
हम अंतर तक अनुभूति करके भी
शब्द नही दे सकते जैसे,
आपस की बदमासियाँ, नादानिया
फिर नाराज होने पर भी एक हो जाना,
यही तो है,
जो पद सम्मान, धन, मान से परे है,
जहां हम दिल से जुड़ते हैं,
समुन्दर की लहरों की तरह,
एक दूसरे को धकियाते,
हटाते जगह बनाते,
इस पार से उस पार जाते पर,
एक दूसरे से कभी अलग नही हो पाते
पानी के अनगिनत बनते बिगड़ते धाराओं में, क्योंकि हम सब भी जल धाराये हैं
मित्रता के संमुदर में,
-व्योमेश
काशी,09.05-2025