उत्तर आये है सारे देवगण
बनारस के गंगा घाट पर
रात है पूर्णिमा की
पर आज चांद भी उतर आया है लजा कर
छिपा है कहीं दीयों के रोशनी के कोने में
उसे आज अपनी रोशनी व चमक फीकी लग रही
घाट पर झिलमिलाते दीपों की कतारों से
केवल देवता ही नही, असुर गंधर्व,ऋषि भी
देख देख के प्रमुदित हो रहे चमकते प्रकाश को
कही उलाहना भी है उनके मन में चांद के प्रति
और कही प्रताड़ना भी चांद से
देखो आज बनारस के घाटों पर कितने चांद उतरे है
तुम्हे भ्रम है कि तुम अकेले रोशनी बिखेरते हो
पर निर्विकार बैठे है काशी पुराधिपति शिव
अपने विश्वनाथ धाम में
हमेशा की तरह सुख दुख पाप पुण्य से परे
अपने नन्दी के साथ अलमस्त, निर्विचार
उनके लिये जैसे त्रिपुरासुर का वध
सामान्य सी घटना हो
और अपने पुराधिपति पार्वतेपति
शंकर की तरह अलमस्त निर्विकार भाव से
देव दीपावली के दिये जला रहा काशी
आदि केशव से अरसी तलक
अपने उल्लास से.......
काशी, देवदीपावली,25.11.2025
बनारस के गंगा घाट पर
रात है पूर्णिमा की
पर आज चांद भी उतर आया है लजा कर
छिपा है कहीं दीयों के रोशनी के कोने में
उसे आज अपनी रोशनी व चमक फीकी लग रही
घाट पर झिलमिलाते दीपों की कतारों से
केवल देवता ही नही, असुर गंधर्व,ऋषि भी
देख देख के प्रमुदित हो रहे चमकते प्रकाश को
कही उलाहना भी है उनके मन में चांद के प्रति
और कही प्रताड़ना भी चांद से
देखो आज बनारस के घाटों पर कितने चांद उतरे है
तुम्हे भ्रम है कि तुम अकेले रोशनी बिखेरते हो
पर निर्विकार बैठे है काशी पुराधिपति शिव
अपने विश्वनाथ धाम में
हमेशा की तरह सुख दुख पाप पुण्य से परे
अपने नन्दी के साथ अलमस्त, निर्विचार
उनके लिये जैसे त्रिपुरासुर का वध
सामान्य सी घटना हो
और अपने पुराधिपति पार्वतेपति
शंकर की तरह अलमस्त निर्विकार भाव से
देव दीपावली के दिये जला रहा काशी
आदि केशव से अरसी तलक
अपने उल्लास से.......
काशी, देवदीपावली,25.11.2025