शुरु होती है मोहल्लेवार
अपने अपने समय व अपने तरीके से
ब्रहममुहुर्त से लेकर नौ बजे तक
जब सूरज लाल से पीला होने लगता है
आरिकेशव से शूलटंकेश्वर तक
कैथी से कंदवा तक
हर मोहल्ले और गांव की
सुबह ए बनारस की अलग-अलग
परिभाषा है, परम्परा और प्रयोग भी
बल्कि यह प्रयोग तो एकल है
हर बनारसी के अपने अपने मिजाज
और मर्जी से,
राधेश्याम चचा चाची के संग
दशाश्वमेय पर नहा उगते सूरज को
अर्ध्य देते है
तो उनका बेटा महीप निकल जाता है
सुबह के साढ़े चार बजे जिम में
बिटिया भावना शामिल होती है
सुबह ए बनारस अस्सी घाट के योग में
अपनी दुलारी भाली निशा के संग
जो सुन कर ही वहां
पूरा करती है अपने विवाह पूर्व
संगीत का शौक
अस्सी पर सुबह ए बनारस के सांस्कृतिक मंच
पर हो रहे कार्यक्रम की श्रोता बन कर
चेतगंज का दिलीपवा चार बजे ही
हौंकाता है अपनी भट्ठी, अखबार के इंतजार संग
क्योंकि साढे चार बजे तक आने लगते है
उसके नेमी ग्राहक जो चाय पीने के साथ
सूचना सूत्र है पूरे मोहल्लेऔर बनारस के
मैदागिन चौमुहानी पर निकलने लगती है
गरमा गरम कचौड़ियां
औ भग्गू हलवाई व्यस्त है जलेबी छानते
अपने लेफ्ट राईट मुन्नवा औ पप्पू आ को ललकारने में
कचहरी गोलघर पर मची है अफरा तफरी
अखबार के हाकरों मे बंडल बनाने में
मिथतेश महराज नहा धो टाईट हो
सजानें सवारनें में व्यस्त है महावीरजी को
क्योंकि भोरहरी से लगता है रेला नेमी भक्तों का
रब्बन मियां के दोनों पैरों मे
होती है दो अलग-अलग चप्पलें अकसर
फज्र के वक्त मस्जिद पहुंचने की जल्दी में
जबकि वे अजान सुनते ही कोशिश करते हैं
उठ के तैयार होने की, कि कोई रकात छुट न जाये
भोनू सरदार नवाजने लगते है गालियों से
अपने जवान हो रहे लड़के सुरेश को
जो भैस गाय को सानी पानी के समय
चादर मे मुंह ढांपे मोबाईल चला रहा है
भोजूबीर सुंदरपुर गुलजार होने लगता है
सुबह की सैर के बाद सट्ची में
ताजी सब्जी खरीदने वालों से
पाण्डेपुर चौमुहानी की दूध सट्टी
अर्दलीबजार की लेबर सट्टी
से लेकर हर मोहल्ले की होती है
अपनी अपनी सुबह अपने बनारस में,
उस सुबह ए बनारस के नजारे से अलग
जो घाट किनार गंगा जी में होती है
अस्सी से राजघाट तक......
http://chitravansh.blogspot.com