समाज जिसमे हम रहते हैं ........
आज हम विश्वसनीयता के प्रश्न पर सबसे महत्वपूर्ण दहलीज पर खड़े हैं। सत्य, असत्य, विश्वास अविश्वास, पक्षपात, निष्पक्षता, न्याय-अन्याय, रहस्य- बरकत जैसे कई गंभीर प्रश्नों के प्रश्न पर अब हमारा समाज खासकर मुड़कर सोचने को बाध्य है। तथ्यों को अपने हित में देखने और अपने लाभ के पाले में खड़े होन की इस संकुचित दृष्टिकोण ने विश्वसनीयता पर ही संकट और प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सूचना विस्फोट और इंटरनेट के प्रसार ने अब व्यक्ति से लेकर शासन-प्रशासन, न्याय व्यवस्था तक को अपने दायरे में समेट लिया है जिससे मीडिया भी अछूता नहीं रह गया है। हालांकि यह भी सत्य है कि मीडिया भी कहीं न कहीं अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करने में चूक रही है। टीआरपी की दौड़, प्रसार संख्या बढ़ाने, विज्ञापन-वितरण लेने के इस अंधे खेल से बार-बार मीडिया के ऊपर गंभीर सवाल उठते हैं। यह सच है कि लोकतंत्र में स्वतंत्र प्रेस का कोई विकल्प नहीं है। यह लोगों के स्वर और सूचना प्रदान करने हेतु विशेष माध्यम होने की अपरिहार्य शर्त है जो लोकतंत्र में सामूहिक राय बनाने में लोगों की मदद करती है।
पत्रकारिता का मूल उद्देश्य यह है कि जनहित के विषयों पर न्याय संगत, यथार्थ, निष्पक्ष, सटीक तथा शालीन विधि से समाचारों, विचारों, टीकाओं तथा जानकारी देकर लोगों की सेवा की जाए। इस प्रयोजन के लिए प्रेस से आशा की जाती है कि वह विश्व स्तर में मान्यता प्राप्त व्यावसायिक और नैतिक मानकों के अनुरूप आचरण करें। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजन प्रसाद देसाई ने वर्ष 2022 में 'पत्रकारिता के आचरण' के संदर्भ में कहा है कि आज प्रेस ने अपने तकनीकी विकास के कारण समाज और शासन में सर्वोच्च महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है। मीडिया जिन विधियों में ग्रहण है, के साथ ही समय के साथ-साथ नए विज्ञान में काफी बदलाव हुए हैं। इन दिनों मीडिया दैनिक के रूप में काम करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी कारण से तथ्यों की समय पर रिपोर्ट करने के लिए पत्रकार अत्यधिक दबाव में काम कर रहे हैं और किसी वारदात की सबसे पहले रिपोर्ट (न्यूज ब्रेक) करने की होड़ अक्सर प्रेस और मीडिया की आचरण को प्रभावित करती है। मीडिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए मीडिया की विश्वसनीयता आवश्यक है। इसलिए प्रेस को अपने पेशे में नैतिक पत्रकारिता के मार्ग पर चलने की जरूरत है।
इस उद्देश्य को ही दृष्टिगत रख भारतीय प्रेस परिषद के समय-समय पर पत्रकारिता के आचरण के मानक संबंधी दिशानिर्देशिका प्रकाशित करती है जिसमें के पत्रकारिता के सिद्धांत और आचार संहिता से लेकर विभिन्न मुद्दों पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि इन दिशा-निर्देशों का उचित ढंग से पालन हो तो पत्रकारिता लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका को शत-प्रतिशत निभा सकेगी। पत्रकारों का दायित्व है कि वे सत्य की रिपोर्टिंग करें और अपनी जानकारी की सत्यता की पुष्टि करें। उन्हें अपनी खबरों पर गहन शोध एवं तथ्यों न की पुष्टि करने के बाद ही तथ्यों को अपने पाठकों, दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। साथ ही समाचार और राय के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहिए। गलत या क अधूरी जानकारी जनता को गुमराह करती है और में पत्रकारिता पर विश्वास कम करती है। आज डिजिटल युग के इस समय में निष्पक्ष एवं तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग बेहद जरूरी है ताकि पाठक और दर्शक स्वयं निर्णय ले सकें। पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे राजनीतिक, आर्थिक या व्यावसायिकं दबावों सहित बाहरी प्रभावों से अपनी स्वतंत्रता बनाए रखें ताकि वे अनुचित प्रभाव से मुक्त रहकर उन लोगों की आवाज बनें जिनकी कोई आवाज नहीं है। आज के मीडिया में कभी-कभी अपने टीआरपी बढ़ाने और सबसे पहले न्यूज ब्रेक करने की होड़ कभी-कभी सनसनीखेजता की सीमा तक चली जाती है। इस संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों ने भी अपने निर्णयों में मीडिया को आगाह किया है। और रिपोर्टिंग से उत्पन्न होने वाले संभावित नुकसान पर भी विचार किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में पत्रकारों को आवश्यकता पड़ने पर अपने स्रोतों की गोपनीयता और पहचान गुप्त रखने का सम्मान करना चाहिए। सूचना जुटाते समय उन्हें अनुचित हस्तक्षेप या उत्पीड़न से बचना चाहिए और सूचना देने वालों या जोखिम में पड़े व्यक्तियों की पहचान को रक्षा दी जानी चाहिए।
पत्रकारिता समाज के विविध दृष्टिकोणों और संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। पत्रकारों को सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखते हुए रूढ़ियों से बचना चाहिए और अपनी रिपोर्टिंग में समावेशिता के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके द्वारा उठाए गए आवाज में विभिन्न समुदायों और हितधारकों का प्रतिनिधित्व हो। एक महत्वपूर्ण पत्रकारों को अपने काम के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और आलोचना के लिए तैयार रहते हुए अपने तरीकों में सुधार जारी रखना चाहिए।
पत्रकारिता एवं मीडिया की भूमिका इसलिए भी ज्यादा जवाबदेह और महत्वपूर्ण हो जाती है कि वे जनता को सूचित करने और स्वस्थ बहस बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे निजता का सम्मान करते हुए जवाबदेही निभाएँ और लोकतंत्र को मजबूत करें। वे एक अधिक समावेशी और जिम्मेदार मीडिया परिदृश्य में योगदान देते हैं।
(हिन्दी पत्रकारिता दिवस 30मई 2026 को व्यक्त विचार) प्रेमचंद पथ अप्रैल-जून 2026 अंक मे प्रकाशित https://chitravansh.blogspot.com
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें