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गुरुवार, 3 मार्च 2016

नव वर्ष २०१६ के अभिनन्दन पर लिखा गया शुभकामना संदेश

बीत गया जीवन का एक और साल
आज कल की आपाधापी में ।
सोचा था बैठेगें कभी साथ साथ
बातें करेगे एक दूसरे से ढेरों
बॉटेगे सारे खट्टे मीठे अतीत
जो हम ने संग संग जिये थे।
सोच साकार नही हो सकी
समयऔर काम काज के बंधन मे
पर हमे मालूम है कि
बेमानी है , ये भौतिक दूरियॉ ।
मिलते है फिर नये साल में
आशा व संकल्प की थाती लेकर
हमें विश्वास है कि हम साथ है
हर पल मन मानस मे एक दूसरे के
और हमारी बेशकीमती पूँजी है
हमारी पवित्र शुभकामनायें ।
              - व्योमेश चित्रवंश

गुरुवार, 11 सितंबर 2008

व्योमेश चित्रवंश की कविताये: नूतन वर्षाभिनंदन

ओ आने वाले नव शिशु वर्ष
कैसे करूँ तेरा अभिनन्दन
तुझको दू आशीस,सुखी हो
या करू टेरता मई पूजन वंदन
बीते दिन बीते जैसे भी
आने वाले दिन शुभ होगें
सुखद ,शुभम, शिवमय हो केर
नव आशा का संचार करेंगे
आयेगा हर दिन लेकर
नव संदेश हमारे जीवन में
लोटे अपने राम हमारी
सुनी पड़ी अयोध्या में

नूतन वर्षाभिनन्दन, 2003, :व्योमेश की कविताये: तुम आ गए....01-01-2003

कल साँझ
ठिठक गए थे मेरे पाँव
मैदेर तक देखता रहा
गंगा में तरते दीप मालाओं को
बीत वर्ष को विदा देते हुए
शन्ख्धवनि, घंटे , घरियालों के मध्य
और आज अल सुबह
अचानक सुन कर किसी की आहट
मैंने खोल दिए थे द्वार
एक ठिठुरता कोहांसा भरा हवा का झोका
मुझे हौले से छूकर निकल गया
झनझना उठे तन मन के सुप्त तर
तभी मैंने पहचान ली थी
तुम्हारी पदचाप
तुम आ गए हो न नववर्ष?

मंगलवार, 9 सितंबर 2008

व्योमेश की कविताये: यादें 30-12-1999

आज मेरे संग फ़िर आ बैठी,
तेरी स्निग्ध , सलोनी यादें,
मन को हौले से छू जाती ,
फ़िर बन कर मिट जाती यादें।
रुक जाओ ओ जाती यादों ,
इतनी निष्ठुर विदा न लो तुम,
आने वाले सुखद क्षणों में,
फ़िर आने की बात करो तुम.

व्योमेश की कविताये: और एक शाम / 02.01.2006

........ और एक शाम
ढल गई, बीती रात,
गया साल, सूरज निकला ,
सुबह-सुबह, नया-नया,
पन्खुरियो पर ओस लिए,
कुछ फुल खिले है,
कलरव करती चिडियों में ,
उल्लास भरा है।
अपना मन भी करता है
उड़ जाने को ,
उत्साहित है नया नया ,
कुछ कर जाने को।
पaयेंगे निश्चित ही ,
हम अपनी मंजिल,
आने वाले नए वर्ष
नई सुबह में.