गुरुवार, 22 जुलाई 2021

व्योमवार्ता/ वैश्विक खात्मे की ओर बढ़ता इंसान

वैश्विक खात्मे की ओर बढ़ रहा इंसान, 19 साल में नर्क हो जाएगी जिंदगी

    दुनिया को खत्म करने के लिए इंसान एकदम सही रास्ते पर चल रहा है. अब से मात्र 19 साल बाद यानी 2040 में इंसानों की जिंदगी नर्क हो जाएगी. ये दावा किया जा रहा है 1972 में बनाई गई एक रिपोर्ट का दोबारा विश्लेषण करने के बाद. क्योंकि इंसान लगातार अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों से भाग रहा है. आइए जानते हैं कि इस रिपोर्ट में इंसानों की जिंदगी को क्यों नर्क बनाने की बात कही गई है. ये क्यों कहा गया है कि इंसान वैश्विक खात्मे की ओर बढ़ रहा है.                    
              1972 में एक किताब छपी थी द लिमिट्स टू ग्रोथ (The Limits to Growth). इसमें मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि औद्योगिक सभ्यता हर कीमत पर लगातार आर्थिक विकास की ओर बढ़ती रही तो एक दिन सरकारें गिर जाएंगी. सहयोग खत्म हो जाएगा. इसकी वजह से भविष्य में 12 संभावित भयावह स्थितियां बन सकती हैं, जो किसी भी इंसान, समुदाय या देश और धरती के लिए फायदेमंद नहीं होंगी.
        इस रिपोर्ट में बताई गई 12 संभावित खतरनाक स्थितियों में से एक सबसे भयावह स्थिति ये थी कि साल 2040 तक दुनिया का आर्थिक विकास तेजी से होगा. यह अपने पीक पर रहेगा. उसके बाद एकदम तेजी से नीचे गिरेगा. इसके साथ ही वैश्विक आबादी कम होगी. खाना की कमी होगी. साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की भारी किल्लत होगी. इसे बिजनेस ऐज यूजुअल (Business As Usual - BAU) सीनेरियो कहा गया।
इस वैश्विक गिरावट से इंसानों की नस्ल तो खत्म नहीं होगी, लेकिन बिना पैसे, बिना खाने और बिना प्राकृतिक संसाधनों के इनकी जिदंगी नर्क हो जाएगी. स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग पूरी दुनिया में गिर जाएगा. अब इस बात की पुष्टि और वर्तमान परिस्थितियों में क्या होगा भविष्य में यह जानने के लिए MIT की सस्टेनिबिलिटी और डायनेमिक सिस्टम एनालिसिस रिसर्चर गैरी हैरिंग्टन ने इस रिपोर्ट का आज के अनुसार फिर से विश्लेषण किया. जिसकी रिपोर्ट येल जर्नल ऑफ इंडस्ट्रियल इकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. 
पिछले साल ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट हुई हैं. वो आज के रियल वर्ल्ड डेटा के साथ द लिमिट्स टू ग्रोथ (The Limits to Growth) का एनालिसिस कर रही हैं. इस एनालिसिस में गैरी ने 10 फैक्टर्स पर ध्यान दिया. जिनमें आबादी, प्रजनन दर, प्रदूषण स्तर, खाद्य उत्पादन और औद्योगिक आउटपुट प्रमुख हैं. उन्होंने देखा कि इस एनालिसिस के परिणाम बहुत हद तक 1972 में प्रस्तावित BAU सीनेरियो से मिलते-जुलते हैं. हालांकि, एक जगह रियायत मिलने की संभावना है.
गैरी ने बताया कि एक सीनेरियो उस रिपोर्ट  में बताई गई थी, जिसे कॉम्प्रिहेंसिव टेक्नोलॉजी (CT) कहा गया. यानी तकनीकी रूप से इतना ज्यादा विकास हो जाए कि प्रदूषण कम किया जा सके और खाद्य सामग्रियों का उत्पादन बढ़ाया जा सके. ताकि प्राकृतिक संसाधनों की कमी भी हो तो खाने की कमी न हो. लेकिन इससे बढ़ती हुई वैश्विक आबादी और व्यक्तिगत कल्याण की भावना को नुकसान पहुंचता है. 
     इसके पीछे वजह ये है कि जब प्राकृतिक संसाधनों की कमी होगी, तब आर्थिक विकास तेजी से नीचे की ओर गिरेगा. यानी आज के औद्योगिक सभ्यता का तेजी से पतन होगा. गैरी कहती है कि आज से करीब 10 साल बाद ही BAU और CT सीनेरियो के विकास में बाधा आने लगेगी. ये रुक जाएंगे. यानी लगातार विकास की कोई भी अवधारणा पूरी नहीं होगी. इससे इंसानों को नुकसान होने लगेगा. 
गैरी ने कहा फिलहाल अच्छी खबर ये है कि अब भी देर नहीं हुई है. इन दोनों परिस्थितियों से बचने के लिए इंसानी समाज को सही दिशा और दशा में काम करना होगा. इसका विकल्प है - स्टैबलाइज्ड वर्ल्ड सीनेरियो (Stablilized World Scenario) यानी स्थिर दुनिया परिस्थिति. इस स्थिति में आबादी, प्रदूषण, आर्थिक विकास तो बढ़ेंगे लेकिन प्राकृतिक संसाधन धीरे-धीरे कम होंगे. इससे फायदा ये होगा कि जैसे ही प्राकृतिक संसाधनों की कमी दिखे, आप बाकी को रोक दें या सीमित कर दें. 
तकनीकी विकास के साथ स्टैबलाइज्ड वर्ल्ड सीनेरियो को चलाएं तो उससे वैश्विक समाज की प्राथमिकताएं बदलेंगी. गैरी ने कहा कि लोगों को अपने मूल्यों पर काम करना होगा. नीतियां बनानी होंगी. परिवार छोटे रखने होंगे. चाहतें और जरूरतें कम करनी होंगी. जन्म दर को नियंत्रित करना होगा. औद्योगिक आउटपुट को सीमित करना होगा, सेहत और शिक्षा को प्राथमिकता से चलाना होगा. इससे प्राकृतिक संसाधन सीमित तरीके से खर्च होंगे. तब धरती बचेगी, इससे इंसान और उसके देश बचेंगे.
स्टैबलाइज्ड वर्ल्ड सीनेरियो (Stablilized World Scenario) के ग्राफ को देखें तो इससे पता चलता है कि उस समय यानी 20 साल बाद भी वैश्विक आबादी के हिसाब से खाद्य सामग्री रहेगी. प्रदूषण कम होगा. प्राकृतिक संसाधनों की कमी स्थिर हो जाएगी. सामाजिक खात्मे को बचाया जा सकेगा. ये एक काल्पनिक परिस्थिति लगती है क्योंकि उस समय तक कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ चुकी होगी. लेकिन अगर इस सीनेरियो के हिसाब से चले तो वह भी कम होगा. 
गैरी ने बताया कि कैसे इंसान ने वैश्विक स्तर पर एकता दिखाई है. कोविड-19 के समय में जब वैक्सीन विकसित करने और उसे पूरी दुनिया में पहुंचाने की बात आई तो इंसानों ने एकता दिखाई. सामुदायिक और वैश्विक जिम्मेदारी निभाई है. इसी तरह अगर हर देश का इंसान जलवायु समस्या को एकसाथ मिलकर खत्म करने की कोशिश करे तो कुछ भी संभव है. हम अपना भविष्य किसी भी समय सुधार सकते हैं. 
गैरी हैरिंग्टन कहती हैं कि अभी देर नहीं हुई है. अगर इंसान अपनी आबादी, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और औद्योगिक विकास की रफ्तार को सीमित करे तो वह 20 साल बाद भी सुरक्षित रह सकता है. इसके लिए जरूरी है कि इंसानियत अपनी सीमा तय करें. या फिर किसी बिंदु पर पहुंच कर सीमा बना दें. ताकि मानव कल्याण की भावना धरती से खत्म न होने पाए.
(आजतक ब्लाग पर प्रकाशित एक लेख)
#व्योमवार्ता
काशी, 22जुलाई 2021, गुरूवार
http:chitravansh.blogspot.com

मंगलवार, 20 जुलाई 2021

व्योमवार्ता / धरती के भगवान (भाग-5)

धरती के भगवान (भाग-5)

पिछले दिनों बाबा #रामदेव ने एलोपैथ के कारोबार पर सवाल  क्या उठाया। देश के डाक्टर्स बिलबिला उठे। पर एक कटु सच्चाई सबके सामन आ गई।डाक्टरों के बौखलाहट से ये तो समझ मे आ गया कि बाबा रामदेव ने मधु मख्खी के छत्ते को पत्थर मारा है जो बहुत सोची समझी स्टाइल से भारत की #प्राकृतिक_चिकित्सा को आहिस्ता आहिस्ता खत्म कर रहे थे और उसमे काफी हद तक सफल भी थे।
हमारे बड़े भाई डाॅ०उमा शंकर सिंह जी डा. उमा शंकर सिंह  ने पूरे प्रकरण पर गहराई से विचार कर परिचित डाक्टरों के समक्ष कुछ सवाल उठाये पर किसी भी #डाक्टर ने इसका जबाब नही दिया। बल्क सच तो ये है कि धरती के भगवान कहे जाने वाले किसी डाक्टर के पास इन सवालों का जबाब है भी नही। यदि है तो वे देना नही चाहते। कुल मिला कर स्थिति जलेबी की तरह गोल गोल घूम वैसे हीह बन जाती है जो आपको बेहतरीन स्वाद के आड़ मे अनजानेन ही ढेर सारी चीनी खिला देती है। भाई उमा शंकर सिंह का #स्वैच्छिक_संगठनों मे कार्य करने व #ग्रामीण_स्वास्थ्य_शिक्षा पर कार्य करने का लंबा अनुभव रहा है। उनके उठाये सवाल हमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति विशेषकर डाक्टरों के नीयत व कर्तव्य पर गंभीरता से सोचने पर मजबूर करते हैं।
वे सभी सवाल आज ज्यादा प्रासंगिक है जिन्हे अब जनता पूछना चाह रही है डाक्टरों से भी  और सरकार से भी कि...

1.#एलोपैथी की दवाई में #MRP की जगह #प्रोडक्शन_कॉस्ट बता दे तो बड़ी बड़ी #फार्मास्युटिकल कंपनीयाँ कितनी लूंट मचा रही है वो जनता को समझ आएगा ।

2.एक ही दवाई की बीस कंपनी के अलग दाम क्यों है?

3.डॉक्टरों को यूरोप की टूर कंपनी वाले क्यों देते हैं ?
डॉक्टरो के घर के AC, TV, Fridge और बहोत सारी बाते #pharma कंपनीयो की देन क्यों होती है..?

4.#जेनरिक दवाइयों को #सरकार को क्यों लाना पड़ा है?

5.कुछ मेडिकल स्टोर्स 20 से 30 % डिस्काउंट क्यों देते हैं? इतना #डिस्काउंट है तो कमाई कितनी है?

6.हॉस्पिटल्स के कमरे का किराया 3 हजार से 60 हजार एक दिन का क्यों है? भारत की 5 स्टार 7 स्टार होटल से भी इन #हॉस्पिटल्स का भाडा ज्यादा क्यों है?

7.#मेडिक्लेम आने के बाद 1996 से मेडिकल #ट्रीटमेंट इतनी महेंगी क्यों हुई?

8.बड़े दवाई के #डिस्ट्रीब्यूटर दस बीस करोड़ की प्रॉपर्टी गाजर मूली के जैसे क्यों खरीदते हैं?

9.जब भी कोई नया हॉस्पिटल तैयार होता है तो वहा की pharmacy वाला वाला दुकान Shops करोडों में कैसे बिकती है

10.केंद्र सरकार भी दवाई की ऊपर भाव क्यों नही बांध सकती है?

11.#लूट_का_लाइसेंस किसने दिया इन फार्मा कंपनियों को?

12.सभी बातों को साइंस से प्रमाणित किया जाना अच्छी बात है लेकिन विज्ञान में आज जो सही है वो कल गलत हो जाता है ऐसा क्यों है?

13.दूसरी #पारम्परिक_दवाईओ को जो आज तक हमारी दादीमाँ और वैध देते आये थे उसको नजरअंदाज करने के लिए #ब्रेनवॉश किस ने किया?

14.दूसरी सब चिकित्सा पद्धतियों को क्यों नजरअंदाज किया गया?

15.एलोपैथी की उम्र कितनी ? प्राचीन #आयुर्वेद कितना पुराना?,
महर्षि #चरक को किसने भुला दिया?

16.भारत मे मौसम अलग अलग है..उस हिसाब से हमारे खान पान है, सेंकडो मिठाई खाने के बाद हमारे बाप दादा 100 साल निकाल लेते थे।

17.#डायबिटीज में सुगर की मात्रा हर चार-पाच साल में नीचे लाने का पाप किसका है?याने जो चार साल पहले #sugar_patient नही था, वो अचानक से अब #Diabetes का रोगी हो गया।
🤔🤔
आप को क्या करना है वो आप को तय करना है। 🤔

*देश की जनता तक #सत्य पहुँचना जरूरी हैं। क्योंकि धरती के भगवान के मुखौटे मे छिपे इन मानवगिद्धों का असली रूप अब ऊजागर होना ही चाहिये।
#धरती_के_भगवान
#मानवगिद्ध

सोमवार, 12 जुलाई 2021

व्योमवार्ता/ धरती के भगवान-3

धरती के भगवान? (भाग-3)

        #एलोपैथी का तो जलवा है ही पर मौका पाते ही #होम्योपैथी वाले भी अपना जलवा दिखा देते है। #बनारस के #भोजूबीर मे विशाल मेगामार्ट के सामने तिराहे के पास एक होम्योपैथी डाक्टर थे #एमएचएमएस। हर मरीज से बातों बातों मे वे अपनी मास्टर डिग्री का जिक्र जरूर कर देते। पर उनके ईलाज के बाद सभी मरीजों की उनके बारे मे आम राय होती थी कि वे #तुक्का_पर_ईलाज करते है। लह गया तो लह गया वरना होम्योपैथी ज्ञान बघारने के लिये #मास्टर_डिग्री का नाम तो है ही।एक बार पत्नी को पीलिया होने पर मैने पत्नी को उन्हे दिखाया। ईलाज शुरू हुआ। शुरूआती परिणाम सकारात्मक भी निकले पर दस दिन बाद टेस्ट कराने पर #बेलीरूबीन काफी बढ़ा हुआ निकला। रिपोर्ट दिखाते समय मैने डाक्टर साहब से जानना चाहा कि सारे दवा परहेज के बावजूद ऐसा कैसे हो गया? ये किसी और बात का लक्षण तो नही?
       डाक्टर साहब ने बड़ा एेंठते हुये जबाब दिया," देखिये, मै इसे समझा नही पाऊगाॅ और आप यह समझ भी नही पायेगें।क्योंकि यह #डाक्टरी है आप की #वकालत नही।"
मेरे लिये ये बड़ी त्रासद स्थिति थी। सरेआम अपमानित महसूस करते हुये मैने कहा" डाक्टर साहब क्षमा किजियेगा। मुझे लगता है कि अगर आप मुझे समझा नही पायेगें तो मेरा ईलाज भी नही कर पायेगें। इसके पीछे के कारण को आप समझ भी नही पायेगें क्योंकि यह डाक्टरी नही #व्यवहारिक_बात है।" बहरहाल मै अपनी पत्नी का ईलाज एक दूसरे डाक्टर साहब से करवाना शुरू किया और आज भी हम लोगों के छोटे मोटे ईलाज के लिये लिये हमारे मोहल्ले के ही बीएचएमएस डाक्टर साहब सस्ता समझाने वाला ईलाज करते हैं। बाद मे वो एमएचएमएस डाक्टर साहब अन्यत्र कालोनी मे मकान  बनवा कर अपनी #क्लिनिक वहां स्थानान्तरित कर लिये। पर उनके पिता जी की होम्योपैथिक दवा की दुकान वही है। आज भी एमएचएमएस डाक्टर साहब की लिखी हुई पेटेण्ट दवाईयां आपको वहीं से ही लेनी पड़ेगी। भले ही आप की खुद की होम्योपैथी दुकान क्यों न हो?
इसे कहते है अपने साथ साथ अपने #परिवार का भी #रोजगार।
चलती दुकान का नाम है हूजूर।
#धरती_के_भगवान?
#मानवगिद्ध

रविवार, 11 जुलाई 2021

व्योमवार्ता/ धरती के भगवान-4

धरती के भगवान? (भाग-4)
     
         #कोविड_टीकाकरण के दूसरे डोज के लिये #वाराणसी के #नगरीय_सामुदायिक_स्वास्थ्य_केन्द्र_चौकाघाट जाना हुआ। पुराने जीटी रोड चौकाघाट से ढेलवरिया वाले पहुंच मार्ग पर एकदम रेलवे लाईन के बगल मे बना है यह स्वास्थ्य केन्द्र। पहले मात्र प्रसूति #चिकित्सालय के रूप मे स्थापित केन्द्र को लगभग दस साल पहले उच्चीकृत कर #यूसीएचसी बना कर सरकार ने ढेर सारे #चिकित्सा_विशेषज्ञों की नियुक्ति भी कर दिया। पेड़ पौधों के बीच बने अस्पताल मे गैरचिकित्सकीय एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की अच्छी खासी फौज है।आजकल कोविड टीकाकरण के लाभार्थियों की भीड़ है बाकी समय पर #डिलीवरी_केसेज को छोड़ कर कोई नही दिखता। कारण डाक्टर साहब नही रहते। यहां दशको से भी अधिक समय से जमी हुई दो #एएनएम डिलीवरी केसेज को अपने ढंग से डील कर लेती है। यह डील तीन हजार तो कभी सौ दो सौ रूपये कम मे आराम से हो जाती है।
यूं तो यहां जनरलसर्जन, एनेस्थिसिया स्पेशलिस्ट, फीजिशियन, गायनोलाजिस्ट स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ,बालरोग विशेषज्ञ जैसे पदों पर कई नियुक्तियां है पर चिकित्सालय प्रभारी #डा०मनमोहन व फीजिशियन #डा०निशान्त_चौधरी को छोड़ कर बाकी डाक्टरों को मरीज तो क्या शायद अस्पताल ने भी कभी देखा हो? न आने वाले डाक्टरों का #काकस इतना मजबूत है कि उन्होने अपनी ओर उंगली न उठने के लिये #सीएमओ कार्यालय मे सेटिंग कर अस्पताल मे बैठने और मरीज देखने वाले डा० मनमोहन की  एडिशनल ड्यूटी #पोस्टमार्टम हाऊस मे तो डा०निशान्त की ड्यूटी #कोरोना_हास्पीटल मे लगवा दिया ताकि वे लोग भी अस्पताल पर न रह सकें।इन डाक्टरों मे कोई #मंत्री का रिश्तेदार है तो कोई #सचिव का खास।
       ऊपर से तुर्रा यह कि इन सभी डाक्टरों के #हस्ताक्षर उपस्थिति पंजिका पर ठीक दस बजे हो जाते है। #ड्यूटीरूम मे रखे #रजिस्टर पर डाक्टर साहब के गैरमौजूदगी मे उनके दस्तखत कैसे हो जाते है? इसका राज भी यहां दशकों से मालिकाना चला रही उन्ही दोनों एएनएम्स को ही पता है। अगर इन डाक्टरों के #सीयूजी मोबाईल फोन के #लोकेसन को अस्पताल के #रिकार्ड से मिलान कर लिया जाये तो धरती के इन कथित भगवानों की #मरीजों के प्रति निष्ठा व #चिकित्सा सेवा के प्रति #समर्पण का सच सामने आ जायेगा।
       टीका लगवाने के बाद चिकित्साकर्मियों को धन्यवाद देने के लिये वहीं बैठे एक स्थानीय व्यक्ति से मैने पूछा कि "इंचार्ज साहब, कब मिलेगें?" तो उसने बताया कि "भैया छक्के पंजे से दूर बेचारे बस इंचार्ज साहब और चौधरी साहब ही तो मिलते है यहां।बाकी का पता नही।"
मेरे कारण पूछने पर उसने बड़ी मासूमियत से बताया कि " पहले जो इंचार्ज साब थी वो बहुत बड़े नेता की बीबी थी, वे तो चार्ज लेने व देने भी अस्पताल पर नही आई थी।अभी के दो दो डाक्टर साहब एक ही परिवार के है। वे यहीं पाण्डेपुर मे अपना अस्पताल देखेगें कि यहां आयेगें? #सरकार अनायास का डेढ़ दो लाख रूपये दे ही रही है।"
        धरती के भगवान कहे जाने वाले सरकारी सेवारत #राजपत्रित_चिकित्सकों के अपने निजी नर्सिंगहोम, प्राईवेट क्लिनिक व आन काल विजिट से अंधाधुंध धन कमाने मे पूरे मनोयोग से    चिकित्सा सेवा देने वाले इन मानवगिद्धों के लिये क्या कोई और नाम सार्थक हो तो अवश्य सुझाईयेगा।
आखिर बड़े मेहनत से काफी पैसे खर्च कर डाक्टर बने है हूजूर।
अब पैसा नही लूटेगें तो कब लूटेगे?
#धरती_के_भगवान?
#मानवगिद्ध
#UCHC_choukaghat

व्योमवार्ता/धरती के भगवान -2

धरती के भगवान? (भाग-2)

        एक मित्र ने #बीएचयू के #मेडिसिन विभाग के एक पूर्व प्रोफेसर साहब के यहां का अनुभव साझा किया। #बनारस के #सुसुवाहीं मे क्लिनिक वाले प्रोफेसर साहब के यहां अलसुबह से मरीजों के नंबर लगने लगते हैं। नंबर लगने के साथ ही #परामर्श शुल्क जमा हो जाता है। यदि आप परामर्श शुल्क के साथ ही उतनी राशि की सुविधा शुल्क काउंटर पर पकड़ा दें तो आप का नंबर 1से 10, 15 के बीच आ जायेगा। मित्र डाक्टर साहब से पूर्व परिचित रहे हैं लिहाजा उन्होने इस बात को #डाक्टर साहेब से कहा तो उन्होने हंसते हुये कहा कि "अरे सब लड़के है इसी तरह दो चार रूपये एक्स्ट्रा पा जाते है।" अगली बार काउंटर वाले लड़के से मित्र ने यह बात पूछा तो उसने बताया कि "कुल पैसवा हमी थोड़े रख लेते हैं उसका भी तो सर को हिसाब देना पड़ जाता है। देखिये यह सीसी कैमरा वगैरह इसी लिये तो लगा है।"
यह भी डाक्टरी का एक #नया_चलन है। परामर्श का अलग और नंबर लगाने का अलग ।
मरीज की तो अपनी मजबूरी है उसे दिखाना ही है। नही तो उस दिन का पूरा समय गाड़ी घोड़ा का खर्चा नुकसान जायेगा इससे अच्छा है यहीं पैसा दे कर खाली हो जाओ।
मरीज की परेशानी का रास्ता तो तलाश रखा है इन मानवगिद्धों ने।
चलती दुकान का नाम है हूजूर।
#धरती_के_भगवान?
#मानवगिद्ध

व्योमवार्ता/ धरती के भगवान -1

धरती के भगवान? (भाग-1)

#बनारस के #वरूणापार के एक इण्डोक्राईन विशेषज्ञ के यहां नंबर मोबाईल से सुबह 7से 7.30बजे लगता है। मोबाईल ठीक 7 बजे खुलेगा और लगातार बिजी रहते हुये 7.29 पर स्विचआफ हो जायेगा।
मरीज परेशान हो पर उनके स्टाफ का क्या?
वे तो ये भी नही बताने की जहमत नही उठाते कि #डाक्टर साहब आज है ही नही।
चलती दुकान का नाम है हूजूर।
#धरती_के_भगवान?
#मानवगिद्ध?

व्योमवार्ता/ #धरतीके भगवान

धरती के भगवान?

     अभी #डाक्टर्स_डे बीते तीन चार दिन ही हुये।आज भी हमारे समाज मे ऐसे #डाक्टर है जिनके प्रति हम श्रद्धा व सम्मान से नतमस्तक हो जाते हैं। #कोरोना काल मे डाक्टर हमे भगवान के रूप मे दिखे। इसमें कोई संदेह नही कि डाक्टरों एवं #पैरा_मेडिकल स्टाफ सहित पुलिस, सुरक्षा बल, बैंककर्मी एवं अन्य फ्रण्टल सेवारत कर्मियों ने अपनी भूमिका बहुत ही अच्छे ढंग से निर्वहन किया परंतु #चिकित्साकर्मियों के सफेद चोंगे और उनके सहायकों दुकानदार, पीआरओ, अन्य रूपों मे बहुत सारे मानवगिद्ध भी नजर आये जो इस आपदा मे भी अपना #शैतानी_चेहरा और #धनपिपासा को दिखाने से बाज नही आये।
       सच तो ये है कि ऐसे मानवगिद्ध हमारे समाज मे पिछले 30 सालों से लगातार बढ़ रहे हैं  । यह #श्रृंखला ऐसे ही मानव गिद्धों पर है जिन्हे हम मजबूरीवस धरती के भगवान मानते हैं।
            आप सभी इस तरह के व्यक्तिगत अनुभवों से दो चार हो चुके है और हो रहे है। कृपया उन्हे व्यक्त कर इन मानवगिद्धों को भगवान के चोंगें से बाहर कर समाज को उनका #वास्तविक_चेहरा दिखाने मे सहायक बनें।
#धरती_के_भगवान ?
#मानवगिद्ध

व्योमवार्ता/ आर्य सनातनी ही भारत के मूल निवासी है़ंं

व्योमवार्ता/आर्य(सनातनी) ही भारत के मूल निवासी है/ व्योमेश चित्रवंश की डायरी 11जुलाई2021

     नये नये नेता बने एक मित्र कभी कभी हमसे #राजनीतिक_बहस करना चाहते हैं।आजकल के राजनीतिक गणित के जमाने के हिसाब से खुद को #नवबौद्ध कहते है। नेता है तो अब तक चल रहे सभी स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाना लाजमी है।सत्ता के विरोध मे है तो भारतीय जनता पार्टी के साथ साथ #भारतीय_संस्कृति, #भारतीय_इतिहास के विरोघ मे बोलना व #कम्यूनिष्ट_विचारधारा का समर्थन करना उनका राजनीतिक घर्म व कर्तव्य बन गया  है । कल बहस कर रहे थे कि केवल #आदिम_जनजातिया़ ही #भारतीय है बाकी सभी बाहरी है। #आर्य बाहर से आये। मै आज तक ये नही समझ पाया कि ये कथित नेता, नवबौद्ध , #धर्मांतरित_ईसाई, पांच सात पीढ़ी #इस्लाम बने कतिपय लोग कैसे यहां के आर्य #मूल_निवासियो़ से स्वयं  को पृथक कर किस #डीएनए_विश्लेषण के आधार पर  अपने को मूल #आदिम_भारतीय बताते हैं?
         बहरहाल इस तरह के  लोगों से मैं प्राय: सुना करता हूं कि आर्य बाहर से आये । पर ये लोग #रोमिलाथापर, #ईरफानहबीब, #मैक्समूलर के #स्वविरोधाभाषी व #भ्रामक सिद्धान्तो को भी स्पष्ट नही कर पाते। मैं आज उनसे एक बेहद व्यवहारिक बात पूछना चाहता हूँ।
                  #सिकंदर बाहर से आया, राजा #पुरु से युद्ध हुआ । #मुहम्मद_बिन_कासिम आया, राजा #दाहिर से युद्ध हुआ । मुहम्मद #गौरी आया, #पृथ्वीराज से युद्ध हुआ । #बाबर आया, #राणासांगा से युद्ध हुआ । #अकबर से #महाराणाप्रताप का युद्ध हुआ और अकबर से ही रानी #दुर्गावती का भी युद्ध हुआ । #औरंगजेब से #शिवाजी का युद्ध हुआ ।
  अब #अंग्रेजों पर आते हैं ।
अंग्रेजों से रानी #लक्ष्मीबाई का युद्ध हुआ । अंग्रेजों से #तात्याटोपे का युद्ध हुआ । अंग्रेजों से #नानासाहेब का युद्ध हुआ । उसके बाद बहुत से क्रांतिकारी हैं जो हमसब जानते होंगे ।
सवाल ये है कि
अगर आर्य बाहर से आये ! तो कौन सा #आर्य राजा या #हमलावर आया?
    किसी एक का नाम बता दीजिए, उससे जिसने युद्ध किया होगा उसका भी नाम बता दीजिए।
या फिर !
#झूठी_अफवाह, फैलाना बन्द करिए।
     #आर्यों को विदेशी बताना, अंग्रेजो और #वामपंथी_लेखको का षड्यंत्र था । आर्यों के विदेशी होने की झूठी बाते #NCERT की किताबों में इस देश की आर्य(हिंदू)जाति को बतायी जाती है, पढ़ाई जाती है और इस देश के युवा बिना सोचे समझे उसी को सच मान बैठते हैं ।
          इस देश में सैकड़ों ऐसी #खुदाई हो चुकी हैं जिनसे साफ हो चुका है कि आर्य #विदेशी नहीं, इसी देश के #मूल_निवासी हैं । #हड़प्पा और #मोहनजोदड़ो की श्रेष्ठ #सभ्यता भी आर्यो द्वारा ही बसाई गयी हैं । विश्वास ना हो तो #राखीगढ़ी में जो खुदाईयाँ हुई हैं,  उन्हे देखिये।उनसे साफ हो चुका है कि आर्य (सनातनी) भारत के ही मूलनिवासी हैं ।
#व्योमवार्ता
(काशी, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा, सं०२०७८वि० तदनुसार 11जुलाई 2021, रविवार)
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शुक्रवार, 18 जून 2021

मेरे लिये गौरव का क्षण / #यह_सड़क_मेरे_गांव_को_नही_जाती का विमोचन प्रख्यात चि्तक व विधानसभाध्यक्ष पं०हृदय नारायण दीक्षित जी के करकमलों से

मेरे लिये गौरव का क्षण
(व्योमेश चित्रवंश की डायरी,17जून2021)

आज नवगीत के उन्नायक सुप्रशिद्ध साहित्यकार डाॅ०शभुनाथ सिंह जी के १०५वीं जयन्ती पर आभाषी समारोह मे उत्तर प्रदेश के #विधानसभाध्यक्ष व चिंतक आदरणीय पं० हृदय नारायण दीक्षित जी के कर कमलों द्वारा मेरी कृति '#यह_सड़क_मेरे_गांव_को_नही_जाती' का विमोचन होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर उनके आशीर्वाद व प्रशंसात्मक प्रोत्साहन के लिये आह्लादित हूं।
बहुत बहुत आभार #डाॅ०_शंभुनाथसिंह_रिसर्च_फाऊण्डेशन के राजीव भैया Rajeev Kumar Singh  व रोली भाभी Rolee Singh , इस बरसात मे भी स्वयं प्रयास कर मेरा सपना सच करने के लिये।
आदरणीय गुरूवर डाॅ०राम सुधार सिंह सर Ramsudhar Singh का जिन्होने संक्षिप्त परिचय मे पूरी पुस्तक का भाव व्यक्त किया। फाऊण्डेशन की अध्यक्षा विजयश्री दीदी Vijayshree Singh , प्रशिद्ध नवगीतकार आदरणीय डाॅ०बुद्धिनाथ मिश्र जी, हिन्दुस्तानी अकादमी प्रयागराज के अध्यक्ष डाॅ उदय प्रताप सिंह व वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ० इंदीवर जी एवं सभी शुभेच्छुओं के प्रति आभार।
आप सब का स्नेह बना रहे🙏
(काशी,17 जून2021, गुरूवार)
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